विम्सहर्स्ट-होल्ट्ज मशीन | कार्य सिद्धांत

विम्सहर्स्ट-होल्ट्ज मशीन | कार्य सिद्धांत: इलेक्ट्रोस्टैटिक जनरेटर का संरचना, संचालन व उपयोग, विस्तार से जानें। भौतिकी के छात्रों के लिए उपयोगी।

विम्सहर्स्ट-होल्ट्ज मशीन | कार्य सिद्धांत

विम्सहर्स्ट-होल्ट्ज मशीन एक विद्युतजनित्र (electrostatic generator) है, जो विद्युत आवेश के दोलों को उत्पन्न करता है। यह मशीन 19वीं सदी के अंत में विकसित की गई थी और आज भी विद्युत और विद्युतस्थतिकी (electrostatics) के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है। इस लेख में, हम विम्सहर्स्ट-होल्ट्ज मशीन के कार्य सिद्धांत के बारे में चर्चा करेंगे।

विम्सहर्स्ट मशीन

  • विवरण: विम्सहर्स्ट मशीन का आविष्कार 1880 के दशक में जेम्स विम्सहर्स्ट (James Wimshurst) ने किया था। यह मशीन दो बड़ी, पारदर्शक डाइलेक्ट्रिक डिस्कों का उपयोग करती है जो विपरीत दिशा में घूर्णन करती हैं।
  • घटक: इसमें मेटल की पत्तियाँ (metal sectors), फ्रेम, हैंडल, और दो इलेक्ट्रोड शामिल होते हैं।
  • संचालन: मशीन के हैंडल को घुमाने पर, डिस्कों के बीच संपर्क होता है जिससे आवेश उत्पन्न होता है। ये आवेश कंडेंसर में संचित होते हैं और उच्च वोल्टेज उत्पन्न करते हैं।

होल्ट्ज मशीन

  • विवरण: इस मशीन का आविष्कार 1865 में हैनस होल्ट्ज (Wilhelm Holtz) ने किया था। यह भी एक प्रकार की विद्युतजनित्र है, लेकिन इसका कार्य सिद्धांत अपेक्षाकृत सरल है।
  • घटक: होल्ट्ज मशीन में एक डाइलेक्ट्रिक डिस्क, एक ड्राइविंग बेल्ट, और अलग-अलग स्थानों पर दो ब्रश होते हैं।
  • संचालन: मशीन के घूर्णन से अलग-अलग स्थानों पर विद्युत आवेश उत्पन्न होते हैं। यह आवेश मशीन के डिस्चार्ज इलेक्ट्रोड्स के माध्यम से संतुलित होते हैं।

विम्सहर्स्ट-होल्ट्ज मशीन का संयुक्त कार्य सिद्धांत

विम्सहर्स्ट और होल्ट्ज मशीन के संयोजन से विम्सहर्स्ट-होल्ट्ज मशीन विकसित हुई। इस मशीन का कार्य सिद्धांत निम्नलिखित है:

  1. प्रारंभिक आवेश: मशीन के शुरू होने पर एक छोटा प्रारंभिक आवेश उत्पन्न होता है, जिसे इंड्यूसर (inductor) द्वारा प्रवर्धित किया जाता है। यह प्रारंभिक आवेश डिस्कों के घूर्णन से उत्पन्न होता है।
  2. विद्युत विभाजन: डाइलेक्ट्रिक डिस्कों पर लगे मेटल की पत्तियाँ आवेश को विभाजित करते हैं और उच्च वोल्टेज उत्पन्न करते हैं।
  3. आवेश हस्तांतरण: आवेश ब्रशों के माध्यम से इलेक्ट्रोड्स तक पहुँचाया जाता है, जहाँ संचित होकर उच्च वोल्टेज पैदा करता है।
  4. कंडेंसर भरना: उच्च वोल्टेज को कंडेंसर्स में संग्रहीत किया जाता है, जहाँ से उसे विद्युत उपकरणों में उपयोग किया जा सकता है।
  5. डिस्चार्ज: इलेक्ट्रोड्स के बीच का वॉल्टेज एक सीमा तक पहुँच जाने पर, वह डिस्चार्ज होता है, जिससे एक स्पार्क उत्पन्न होता है।

इस प्रकार, विम्सहर्स्ट-होल्ट्ज मशीन विद्युत आवेश को एकत्रित और विभाजित कर करती है, जिससे उच्च वोल्टेज उत्पन्न होता है। यह मशीन विद्युतस्थतिकी और विद्युतजनित्र के अध्ययन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और हमारे दैनिक जीवन में विभिन्न उपकरणों के विकास में मदद करती है।

Summary

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