सबसे सामान्य चार प्रकार की विद्युतचुंबकीय तरंग मल्टीप्लेक्सिंग तकनीकें: विद्युत संकेतों को एक साथ प्रसारित करने के लिए उपयोगी तरीके।
सबसे सामान्य चार प्रकार की विद्युतचुंबकीय तरंग मल्टीप्लेक्सिंग तकनीकें
विद्युतचुंबकीय तरंग मल्टीप्लेक्सिंग तकनीकें अनेक आवृत्तियों या संकेतों को एक ही माध्यम में संप्रेषण करने की अनुमति देती हैं। इससे संसाधनों का कुशलता से उपयोग हो पाता है। यहाँ हम चार सबसे सामान्य मल्टीप्लेक्सिंग तकनीकों पर चर्चा करेंगे:
1. समय विभाजन मल्टीप्लेक्सिंग (Time Division Multiplexing – TDM)
TDM में, समय को छोटे-छोटे खंडों में विभाजित किया जाता है और प्रत्येक खंड को अलग-अलग संकेतों के लिए आवंटित किया जाता है। प्रत्येक संकेत अपना डेटा उस समय खंड में संप्रेषित करता है, जिससे संकेतों का मिश्रण नहीं होता है।
2. आवृत्ति विभाजन मल्टीप्लेक्सिंग (Frequency Division Multiplexing – FDM)
FDM में, विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम को विभिन्न आवृत्ति बैंड में विभाजित किया जाता है। प्रत्येक आवृत्ति बैंड एक अलग संकेत को फर्क्रि्वेंसी आवंटित करता है और इस प्रकार विभिन्न आवृत्तियों पर संकेत संप्रेषित होते हैं। लोकप्रिय उदाहरण में रेडियो और टीवी प्रसारण शामिल हैं।
3. तरंग दैर्घ्य विभाजन मल्टीप्लेक्सिंग (Wavelength Division Multiplexing – WDM)
WDM ऑप्टिकल फाइबर संचार प्रणाली में उपयोग किया जाता है, जहां विभिन्न संकेत अलग-अलग तरंग दैर्घ्यों के रूप में भेजे जाते हैं। यह तकनीक एक ही फाइबर पर विभिन्न प्रकाश संकेतों को संप्रेषित करने में सक्षम होती है, जिससे डेटा दर बढ़ती है।
4. कोड विभाजन मल्टीप्लेक्सिंग (Code Division Multiplexing – CDM)
CDM में, प्रत्येक संकेत को एक विशिष्ट कोड दिया जाता है और सभी संकेत एक ही समय और आवृत्ति पर संप्रेषित होते हैं। रिसीवर प्रत्येक संकेत को उसके कोड के माध्यम से पहचानता है और डिकोड करता है। यह तकनीक वायरलेस संचार में व्यापक रूप से प्रयोग की जाती है।
इन चार प्रकार की मल्टीप्लेक्सिंग तकनीकों का उपयोग विभिन्न संचार प्रणालियों में किया जाता है और यह संचार उद्योग की रीढ़ हैं। इनके माध्यम से संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होता है और अधिक डेटा दर और उच्च गुणवत्ता संचार संभव होता है।
Summary

