जानें कि वोल्टमीटर कैसे काम करता है, इसके मूल सिद्धांत, प्रयोग और उपयोग के तरीके। सरल भाषा में विद्युत माप का आधार और इसकी कार्यप्रणाली।
वोल्टमीटर कैसे काम करता है?
वोल्टमीटर एक उपकरण है जिसका उपयोग विद्युत परिपथ में वोल्टेज (या विद्युत विभव) को मापने के लिए किया जाता है। यह विभिन्न विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में अत्यधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आइए समझते हैं वोल्टमीटर के काम करने के सिद्धांत और इसके निर्माण के बारे में।
वोल्टमीटर का सिद्धांत
वोल्टमीटर Ohm’s Law पर आधारित होता है, जो विद्युत परिपथ के तीन मुख्य घटकों – वोल्टेज (V), करंट (I) और प्रतिरोध (R) के बीच संबंध को परिभाषित करता है। ओम का नियम निम्नलिखित है:
V = I * R
वोल्टमीटर में बहुत अधिक प्रतिरोध होता है ताकि यह विद्युत परिपथ में न्यूनतम करंट संचालित करें और मापन के दौरान परिपथ के संचालन को प्रभावित न करे।
वोल्टमीटर का निर्माण
- Permanent Magnet Moving Coil (PMMC) गैल्वानोमीटर: वोल्टमीटर में PMMC गैल्वानोमीटर मुख्य घटक होता है, जो एक कुंडली और स्थायी चुंबक से बना होता है। जब कुंडली में विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो यह चुंबकीय क्षेत्र के साथ संबंध में घूमती है, जिससे संकेतक (pointer) प्रभावित होता है।
- प्रतिरोध: वोल्टमीटर के साथ एक उच्च प्रतिरोध श्रृंखला में जोड़ दिया जाता है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि उपकरण का कुल प्रतिरोध बहुत अधिक हो और यह परिपथ में न्यूनतम विद्युत धारा का संचालन करे।
वोल्टमीटर को सर्किट में जोड़ना
वोल्टमीटर को सदैव समानांतर (parallel) संयोजन में जोड़ा जाता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि इसे मापन किए जाने वाले परिपथ के समान वोल्टेज मिलता है और यह केवल अवश्य आवश्यक धारा को ही संचालित करता है।
वोल्टमीटर का उपयोग
- वोल्टमाप (Voltage Measurement)
- विद्युत परिपथ की जाँच में
- विद्युत उपकरणों की मरम्मत और रखरखाव में
निष्कर्ष
वोल्टमीटर एक अहम उपकरण है जिसका उपयोग वोल्टेज मापने और विद्युत परिपथ के विभिन्न हिस्सों को जाँचने में किया जाता है। इसके डिजाइन में उच्च प्रतिरोध का उपयोग इसे परिपथ में बिना किसी महत्वपूर्ण धारा के संचालन के मापन करने वाला बनाता है। बिना वोल्टमीटर के प्रभावी विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम का निरीक्षण और मरम्मत संभव नहीं होता।
Summary

