प्रकाश-सक्रिय सिलिकॉन-नियंत्रित रेक्टिफायर (LASCR): कार्य सिद्धांत, इसके उपयोग, और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में इसके महत्वपूर्ण लाभ जानें।
प्रकाश-सक्रिय सिलिकॉन-नियंत्रित रेक्टिफायर (LASCR) | कार्य सिद्धांत
प्रकाश-सक्रिय सिलिकॉन-नियंत्रित रेक्टिफायर (Light-Activated Silicon-Controlled Rectifier, LASCR) एक प्रकार का एससीआर (SCR) होता है जो प्रकाश के माध्यम से संचालित होता है। इसका मुख्य उपयोग इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में स्विचिंग और नियंत्रण के कार्यों में किया जाता है। LASCR में जब एक निश्चित तीव्रता का प्रकाश पड़ता है, तब यह चालू (conduct) हो जाता है।
LASCR का कार्य सिद्धांत
LASCR का कार्य सिद्धांत समान्य सिलिकॉन-नियंत्रित रेक्टिफायर (SCR) की तरह ही है, लेकिन इसमें एक फ़ोटोसेंसिटिव सरफेस भी मौजूद होता है। इसका संचालन प्रकिया नीचे दिए गए बिंदुओं द्वारा समझा जा सकता है:
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LASCR में एक एनोड (A), एक कैथोड (K), और एक गेट (G) होता है, जैसे कि सामान्य SCR में होता है।
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गेट टर्मिनल का प्रबंधन प्रकाश-संवेदनशील (photosensitive) क्षेत्र द्वारा किया जाता है। जब इस क्षेत्र पर प्रकाश पड़ता है तो यह चालू होता है।
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जब प्रकाश की किरणें इस क्षेत्र पर पड़ती है, तो इलेक्ट्रॉन्स की ऊर्जा उत्तेजित हो जाती है, जिससे गेट टर्मिनल पर करंट उत्पन्न होता है।
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गेट टर्मिनल पर करंट उत्पन्न होने के बाद, एनोड और कैथोड के बीच का वोल्टेज घट जाता है और LASCR चालू हो जाता है।
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LASCR तब तक चालू रहता है जब तक कि एनोड और कैथोड के बीच का करंट एक निश्चित सीमा से नीचे नहीं गिर जाता।
LASCR का उपयोग
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प्रकाश-सक्षम स्विचिंग: LASCR मुख्य रूप से प्रकाश-सक्षम स्विचिंग एप्लिकेशन में उपयोग होता है जहाँ इसे प्रकाश के माध्यम से चालू और बंद किया जा सकता है।
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उच्च वोल्टेज संरक्षण: LASCR उच्च वोल्टेज और उच्च करंट सर्किट में सुरक्षा के रूप में इस्तेमाल होता है।
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अलार्म सिस्टम्स: LASCR अलार्म सिस्टम्स में भी उपयोग किया जाता है जहाँ यह अनियमितताओं को पहचान सकता है और प्रतिक्रिया दे सकता है।
इस प्रकार, LASCR एक अत्यंत उपयोगी उपकरण है जो प्रकाश-सक्रिय स्विचिंग के विभिन्न अनुप्रयोगों में प्रमुख भूमिका निभाता है।
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