गिलहरी पिंजरा प्रेरण मोटर: कार्य सिद्धांत, संरचना, संचालन के तरीके और उपयोग। जानें कैसे यह मोटर विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलती है।
गिलहरी पिंजरा प्रेरण मोटर | कार्य सिद्धांत
गिलहरी पिंजरा प्रेरण मोटर (Squirrel Cage Induction Motor) एक आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली इलेक्ट्रिक मोटर है, जो अपनी सरलता, दक्षता और लंबे जीवनकाल के लिए जानी जाती है। इसे “गिलहरी पिंजरा” इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके रोटर का निर्माण एक गिलहरी के पिंजरे जैसा होता है।
कार्य सिद्धांत
गिलहरी पिंजरा प्रेरण मोटर का कार्य सिद्धांत फारेडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण नियम और लेंस के नियमों पर आधारित है। यह निम्नलिखित प्रकार से कार्य करता है:
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AC सप्लाई मोटर के स्टेटर पर दी जाती है, जो चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है। यह चुंबकीय क्षेत्र समय के साथ बदलता रहता है।
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जब यह बदलता चुंबकीय क्षेत्र रोटर में पहुंचता है, तो यह रोटर कंडक्टर्स में विद्युतधारा (करंट) उत्पन्न करता है।
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लेंस के नियम के अनुसार, यह उत्पन्न करंट अपने कारण को विरोध करने का प्रयास करता है, जिससे रोटर घूमना शुरू कर देता है।
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रोटर की गति स्टेटर के घूमते हुए चुंबकीय क्षेत्र से थोड़ी कम होती है; इसलिए इसे “स्लिप” कहते हैं।
गणितीय समीकरण
गिलहरी पिंजरा प्रेरण मोटर के लिए स्लिप (S) को निम्नलिखित प्रकार से परिभाषित किया जाता है:
S = \(\frac{Ns – Nr}{Ns}\)
जहां,
निष्कर्ष
गिलहरी पिंजरा प्रेरण मोटर का सरल निर्माण और उच्च दक्षता इसे विभिन्न औद्योगिक अनुप्रयोगों के लिए एक आदर्श विकल्प बनाता है। इसकी परिचालन सुविधा, रखरखाव की कम आवश्यकता और ठोसता इसे अन्य प्रकार की मोटरों से अधिक लोकप्रिय बनाती है। इसकी कार्यप्रणाली को समझना विद्युत इंजीनियरिंग के छात्रों और पेशेवरों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
हेडिंग को P tag से बदलें।
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