कॉक्रॉफ्ट-वॉल्टन वोल्टेज मल्टीप्लायर: सिद्धांत और अनुप्रयोग; यह सर्किट उच्च वोल्टेज उत्पन्न करने की प्रक्रिया और इसके उपयोगों को सरल भाषा में समझाता है।
कॉक्रॉफ्ट-वॉल्टन वोल्टेज मल्टीप्लायर
कॉक्रॉफ्ट-वॉल्टन वोल्टेज मल्टीप्लायर एक बिजली यांत्रिक यंत्र है जो वोल्टेज को बढ़ाने के लिए उपयोग किया जाता है। इसे फिजिसिस्ट जॉन डगलस कॉक्रॉफ्ट और अर्नेस्ट थॉमस सिंटन वॉल्टन द्वारा 1932 में विकसित किया गया था। इस यंत्र का मुख्य उद्देश्य वोल्टेज के स्तर को बहुत अधिक बढ़ाना होता है, जिससे उच्च वोल्टेज परिक्षण या अनुप्रयोग संभव हो सके।
सिद्धांत
कॉक्रॉफ्ट-वॉल्टन वोल्टेज मल्टीप्लायर का सिद्धांत कैपेसिटर (संघ्राहक) और डायोड (एकदिश संसारक) की श्रृंखला पर आधारित होता है। इसमें कैपेसिटर चार्ज और डिस्चार्ज होकर वोल्टेज को बढ़ाते हैं।
कार्य सिद्धांत कुछ इस प्रकार है:
आखिर में, यदि n संख्या की स्टेज का वोल्टेज मल्टीप्लायर है, तो आउटपुट वोल्टेज लगभग n * Vpeak होगा, जहाँ Vpeak इनपुट साइन वेव का पीक वोल्टेज है।
अनुप्रयोग
कॉक्रॉफ्ट-वॉल्टन वोल्टेज मल्टीप्लायर का उपयोग कई क्षेत्रों में होता है:
कॉक्रॉफ्ट-वॉल्टन वोल्टेज मल्टीप्लायर की यह क्षमताएं इसे विभिन्न वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुप्रयोगों में अमूल्य बनाती हैं।
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