PWM कंट्रोलर के करेंट-मोड को समझने के लिए पढ़ें। जानें कि यह कंट्रोलर कैसे वोल्टेज और करंट को नियंत्रित करके कुशलता बढ़ाता है।
करेंट-मोड PWM कंट्रोलर कैसे काम करता है?
करेंट-मोड PWM (Pulse Width Modulation) कंट्रोलर एक प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक सर्किट है जो स्विचिंग रेगुलेटर्स में उपयोग होता है। इसका मुख्य कार्य वोल्टेज रेगुलेशन करना और पावर सप्लाई को स्थिर बनाना है।
काम की प्रक्रिया
करेंट-मोड PWM कंट्रोलर की काम करने की प्रक्रिया को मुख्यत: तीन प्रमुख भागों में बांटा जा सकता है:
करेंट सेंसिंग
सबसे पहले, इनपुट करेंट को सेंस करने के लिए करेंट सेंसिंग सर्किट का उपयोग किया जाता है। यह सर्किट में प्रवाहित हो रहे करेंट को मॉनिटर करता है और एक एनालॉग वोल्टेज सिग्नल प्रोड्यूस करता है जो करेंट के अनुपात में होता है।
कम्पेरेटिव सिग्नल जेनरेशन
कंपेरेटिव सिग्नल जेनरेशन के दौरान, सेंस किए गए करेंट सिग्नल को एक रेफरेंस सिग्नल के साथ तुलना की जाती है। यहां, सेंस्ड करेंट सिग्नल को एक कम्पेरेटर को भेजा जाता है जो इसे रेफरेंस वोल्टेज के साथ कंपेयर करता है। जब सेंस्ड करेंट सिग्नल रेफरेंस सिग्नल को पार करता है, तब कम्पेरेटर एक ट्रिगर सिग्नल उत्पन्न करता है।
PWM सिग्नल प्रोडक्शन
अंत में, कम्पेरेटर से उत्पन्न ट्रिगर सिग्नल का उपयोग PWM सिग्नल जनरेट करने के लिए किया जाता है। यह PWM सिग्नल स्विचिंग डिवाइस (जैसे कि ट्रांजिस्टर या MOSFET) को ऑन और ऑफ करता है। PWM सिग्नल का ड्यूटी साइकिल (Duty Cycle) इनपुट करेंट और आउटपुट वोल्टेज को नियंत्रित करता है।
W = vout * ton / (ton + toff)
लाभ
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, करेंट-मोड PWM कंट्रोलर एक प्रभावी तरीका है पावर सप्लाई के वोल्टेज को स्थिर रखने का। यह करेंट सेंसिंग, कम्पेरेटिव सिग्नल जेनरेशन, और PWM सिग्नल प्रोडक्शन के माध्यम से आउटपुट को नियंत्रित करता है, जिससे सिस्टम की विश्वसनीयता और परफॉरमेंस बढ़ती है।
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