करेंट-मोड क्लास D एम्पलीफायर कैसे काम करता है? उच्च दक्षता वाले एम्पलीफायर का वर्णन, उपयोग और इसके कार्य करने की प्रक्रिया की सरल व्याख्या।
करेंट-मोड क्लास D एम्पलीफायर कैसे काम करता है?
क्लास D एम्पलीफायर एक प्रकार का स्विचिंग एम्पलीफायर होता है जो कम पावर लॉस और उच्च एफिशिएंसी के लिए जाना जाता है। जबकि पारंपरिक लाइनियर एम्पलीफायर एनेलॉग सिग्नल्स को एम्पलीफाई करते हैं, क्लास D एम्पलीफायर डिजिटल या स्विच मोड में काम करते हैं। करेंट-मोड क्लास D एम्पलीफायर इसी तकनीक पर आधारित है, लेकिन इसमे करेंट का प्राथमिक उपयोग होता है।
काम करने का सिद्धांत
क्लास D एम्पलीफायर के मूलभूत डिज़ाइन में एक स्विचिंग सर्किट शामिल है जो इनपुट सिग्नल को हाई फ्रिक्वेंसी PWM (Pulse Width Modulation) सिग्नल में बदलता है। इसमें दो मुख्य स्टेज होते हैं:
इंफुट स्टेज
इनपुट सिग्नल को पहले एक कम्पैरेटर के माध्यम से पास किया जाता है जो इसे PWM सिग्नल में ट्रांसलेट करता है। यहां, सिग्नल की फ्रिक्वेंसी और ड्यूटी साइकल को समायोजित किया जाता है ताकि यह सिग्नल को हाई फ्रिक्वेंसी में कन्वर्ट कर सके।
स्विचिंग स्टेज
स्विचिंग स्टेज में मुख्य रूप से MOSFETs या BJT स्विचेस का उपयोग होता है।
इस प्रक्रिया में, कम पावर लॉस और उच्च एफिशिएंसी सुनिश्चित की जाती है क्योंकि स्विचेस केवल दो स्थितियों में होते हैं: पूरी तरह से ऑन या पूरी तरह से ऑफ।
करेक्शन और फ़िल्टरिंग
स्विचिंग स्टेज के बाद, हमें एक हाई-फ्रिक्वेंसी ट्रांज़िशनिंग सिग्नल मिलता है। इसे वापस ऑडियो सिग्नल में कन्वर्ट करने के लिए एक लो-पास फ़िल्टर का उपयोग किया जाता है।
करेन्ट-मोड संचालित क्लास D एम्पलीफायर की विशेषताएं
इस तरह करेंट-मोड क्लास D एम्पलीफायर बेहद प्रभावी और पावर एफिशिएंट होते हैं, जिससे वे आधुनिक ऑडियो सिस्टम में लोकप्रिय हैं।
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