करंट मिरर कैसे काम करता है? जानें कि करंट मिरर द्वारा बराबर करंट को कैसे बनाए रखा जाता है और इसका उपयोग सर्किट डिज़ाइन में कैसे होता है।
करंट मिरर कैसे काम करता है?
करंट मिरर (Current Mirror) एक साधारण लेकिन महत्वपूर्ण सर्किट होता है जो इलेक्ट्रॉनिक्स में उपयोग किया जाता है, विशेष रूप से एनालॉग सर्किट में। इसका मुख्य उद्देश्य एक निरंतर करंट को मिरर करना या उसकी नकल करना होता है। इसे अक्सर करंट स्रोत के रूप में भी उपयोग किया जाता है।
करंट मिरर का सिद्धांत
करंट मिरर का सिद्धांत ट्रांजिस्टर (Transistor) के अपरिवर्तित (Unchanged) गुण पर आधारित होता है। करंट मिरर के सामान्यत: दो हिस्से होते हैं: एक रेफेरेंस करंट स्रोत और एक करंट मिररिंग ट्रांजिस्टर।
मूल तत्व
कैसे काम करता है करंट मिरर?
सबसे पहले, रेफेरेंस ट्रांजिस्टर (Q1) और मिररिंग ट्रांजिस्टर (Q2) के बेस (Base) को आपस में जोड़ दिया जाता है, और उनके एमिटर (Emitter) को ग्राउंड किया जाता है। रेफेरेंस करंट (IREF) को एक रिज़िस्टर (RREF) के माध्यम से रेफेरेंस ट्रांजिस्टर के कलेक्टर (Collector) में प्रवाहित किया जाता है।
किसी भी करंट मिरर का काम करने की प्रक्रिया
इस प्रकार, करंट मिरर सर्किट में IC2 = IREF।
करंट मिरर के उपयोग
(p>करंट मिरर की यह विशेषताएँ इसे इलेक्ट्रॉनिक्स और एनालॉग सर्किट डिजाइन में एक अपरिहार्य उपकरण बनाती हैं।
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