करंट मिरर: कार्य और अनुप्रयोग। करंट मिरर क्या होता है, इसका काम कैसे करता है, और इसके विभिन्न इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स अनुप्रयोगों की जानकारी।
करंट मिरर: कार्य और अनुप्रयोग
इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में करंट मिरर एक महत्वपूर्ण उपकरण है जो एक शाखा के करंट को दूसरी शाखा में दोहराता है। यह एनालॉग सर्किट डिज़ाइन में बड़े पैमाने पर उपयोग होता है, विशेष रूप से ऐम्पलीफायरों और ऑपरेशनल सर्किट में।
करंट मिरर का कार्य
- करंट मिरर में दो ट्रांजिस्टर होते हैं: एक रेफरेंस ट्रांजिस्टर (Q1) और एक मिरर ट्रांजिस्टर (Q2)।
- एक रेफरेंस करंट (Iref) रेफरेंस ट्रांजिस्टर Q1 के माध्यम से प्रवाहित होता है।
- इस रेफरेंस करंट के परिणामस्वरूप Q1 पर एक नियत वोल्टेज (VBE1) उत्पन्न होता है, जो बेस-एमिटर वोल्टेज कहलाता है।
- यह वोल्टेज Q2 के बेस-एमिटर वोल्टेज (VBE2) से मिलान करता है, जिससे Q2 में वही करंट (Iout) उत्पन्न होता है जो Iref के बराबर होता है।
करंट मिरर का सैद्धांतिक विश्लेषण
करंट मिरर का सैद्धांतिक विश्लेषण सरल है। मान लीजिए कि Q1 और Q2 दोनों ट्रांजिस्टर पूरी तरह मेल खाते हैं और उनका तापमान भी समान है। तब
- VBE1 = VBE2
केल्विन-शोकली समीकरण के अनुसारन्
IC = IS(e(VBE/VT) – 1)
जहां IC कलेक्टर करंट है, IS सैचुरेशन करंट है, VBE बेस-एमिटर वोल्टेज है, और VT थर्मल वोल्टेज है। दोनों ट्रांजिस्टरों के लिए
- Iref = Iout
करंट मिरर के अनुप्रयोग
- बायसिंग करंट का स्थिरीकरण: करंट मिरर का सबसे आम उपयोग ट्रांजिस्टरों में बायसिंग करंट को स्थिर रखने के लिए होता है, ताकि सर्किट स्थिरता बनाए रख सके।
- सक्रिय लोड: करंट मिरर का उपयोग ट्रांजिस्टर ऐम्पलीफायरों में सक्रिय लोड के रूप में भी किया जाता है।
- एडवांस्ड एनालॉग सर्किट: जैसे ऑप-अंप्लिफायर, डिफरेंशियल ऐम्पलीफायर और अन्य एनालॉग सर्किट में करंट मिरर का उपयोग होता है।
- सर्किट के तापमान स्थिरीकरण: करंट मिरर का उपयोग सर्किट के तापमान स्थिरीकरण के लिए भी होता है, क्योंकि यह तापमान में बदलाव के प्रति कम संवेदनशील होता है।
इस प्रकार, करंट मिरर एक बुनियादी लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण घटक है जो विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक सर्किटों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाता है।
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