इलेक्ट्रोमैग्नेटिक संगतता कैसे काम करती है?

इलेक्ट्रोमैग्नेटिक संगतता: यह कैसे काम करती है? जानिए कैसे इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगें इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों की कार्यक्षमता को प्रभावित करती हैं और इसे कैसे नियंत्रित किया जाता है।

इलेक्ट्रोमैग्नेटिक संगतता कैसे काम करती है?

इलेक्ट्रोमैग्नेटिक संगतता (Electromagnetic Compatibility या EMC) एक महत्वपूर्ण विषय है, जो यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि इलेक्ट्रॉनिक और विद्युत उपकरण एक साथ संगत रूप से काम करें। EMC का मुख्य उद्देश्य यह है कि विभिन्न उपकरणों से उत्पन्न होने वाले इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विकिरण आपस में बाधा न डालें और उपकरण ठीक से काम करें।

EMC के मुख्य तत्व

  • इमिशन (Emission): यह वह प्रक्रिया है जिसके दौरान कोई उपकरण इलेक्ट्रोमैग्नेटिक ऊर्जा को उत्सर्जित करता है। यह उत्सर्जन अवांछित विकिरण के रूप में भी हो सकता है, जो अन्य उपकरणों में हस्तक्षेप उत्पन्न कर सकता है।
  • इम्यूनिटी (Immunity): यह किसी उपकरण की क्षमता है कि वह अन्य स्रोतों के विकिरण के बावजूद सही ढंग से कार्य कर सके। यह सुनिश्चित करता है कि उपकरण बाहरी हस्तक्षेप से प्रभावित न हो।

इलेक्ट्रोमैग्नेटिक संगतता कैसे सुनिश्चित की जाती है?

EMC को सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न तकनीकों और विधियों का प्रयोग किया जाता है। आइए, इनमें से कुछ मुख्य विधियों पर नज़र डालते हैं:

  1. शिल्डिंग (Shielding): इसका उपयोग विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विकिरण से बचाने के लिए किया जाता है। शिल्डिंग सामग्री जैसे कॉपर या अल्युमिनियम का उपयोग किया जाता है, जो विकिरण को अवरुद्ध करते हैं।
  2. फिल्टरिंग (Filtering): फिल्टर का उपयोग विकिरण को रोकने और बिना रुकावट के संचार को सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है। यह सुविधाएं विभिन्न प्रकार के यंत्रों, जैसे कि लाइन फिल्टर, द्वारा प्रदान की जाती हैं।
  3. ग्राउंडिंग (Grounding): इसे अर्थिंग भी कहा जाता है, जो उपकरण के निर्विरोध संचालन के लिए एक आवश्यक प्रक्रिया है। यह प्रक्रिया अवांछित विद्युत विकिरण को धरती में स्थानांतरित करती है।

EMC परीक्षण

इलेक्ट्रोमैग्नेटिक संगतता के लिए उपकरणों की जांच करना महत्वपूर्ण होता है, जिसे EMC परीक्षण कहते हैं। यह परीक्षण निम्नलिखित चरणों में किया जाता है:

  1. रेडिएटेड इमिशन (Radiated Emission): यह परीक्षण यह मापता है कि उपकरण कितना विकिरण उत्पन्न करता है। इसे न्यूनतम रखने के लिए परीक्षण किया जाता है।
  2. कंडक्टेड इमिशन (Conducted Emission): इसका परीक्षण यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है कि उपकरण की विद्युत wires के माध्यम से कितना विकिरण निकलता है।
  3. रेडिएटेड इम्यूनिटी (Radiated Immunity): यह परीक्षण यह देखता है कि उपकरण बाहरी विकिरण के प्रति कितना प्रतिरोधी है।
  4. कंडक्टेड इम्यूनिटी (Conducted Immunity): इस परीक्षण के माध्यम से देखा जाता है कि उपकरण विद्युत wires के माध्यम से आने वाली बाहरी विकिरण को कितना सहन कर सकता है।

इलेक्ट्रोमैग्नेटिक संगतता सुनिश्चित करने के लिए ये सभी तकनीकें और परीक्षण अनिवार्य हैं ताकि हमारे उपकरण अच्छी तरह से और बिना रुकावट के काम कर सकें। अत: EMC तकनीक और परीक्षण का ज्ञान किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की डिज़ाइन और निर्माण के समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

Summary

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