आन्तरिक और बाह्य अर्धचालक में अंतर: आन्तरिक अर्धचालक शुद्ध सामग्री होते हैं जबकि बाह्य अर्धचालक अशुद्धियों को मिलाकर बनाए जाते हैं।
आन्तरिक और बाह्य अर्धचालक में क्या अंतर है?
अर्धचालक (Semiconductor) पदार्थ वे हैं जिनका संचालन विद्युत चालक (Conductors) और कुचालक (Insulators) के बीच में होता है। अर्धचालक दो प्रकार के होते हैं: आन्तरिक अर्धचालक (Intrinsic Semiconductor) और बाह्य अर्धचालक (Extrinsic Semiconductor)। दोनों के बीच कुछ महत्वपूर्ण अंतर होते हैं जिनकी चर्चा नीचे की गई है:
- परिभाषा :
- आन्तरिक अर्धचालक: आन्तरिक अर्धचालक वह अर्धचालक है जो शुद्ध रूप में होता है। इसमें कोई मिलावट (doping) नहीं होती है। उदाहरण के लिए, शुद्ध सिलिकॉन (Si) या जर्मेनियम (Ge)।
- बाह्य अर्धचालक: बाह्य अर्धचालक वह अर्धचालक है जिसमें कुछ मात्रा में अशुद्धियाँ मिलाई जाती हैं ताकि इसकी विद्युत चालकता बढ़ सके। इन अशुद्धियों को डोपेंट (dopants) कहा जाता है।
- विद्युत चालकता:
- आन्तरिक अर्धचालक: इसकी विद्युत चालकता (conductivity) बहुत कम होती है क्योंकि इसमें केवल थर्मल उत्तेजना द्वारा उत्पन्न इलेक्ट्रॉन-होल जोड़े होते हैं। इसे दर्शाने वाले सूत्र हैं:
\(\sigma = ne\mu_e + pe\mu_h\)
यहाँ \(\sigma\) विद्युत चालकता, \(n\) इलेक्ट्रॉन्स की संख्या, \(p\) होल्स की संख्या, \(e\) इलेक्ट्रॉन की चार्ज, \(\mu_e\) इलेक्ट्रॉन की गतिशीलता, और \(\mu_h\) होल्स की गतिशीलता है। - बाह्य अर्धचालक: इसमें अशुद्धियों को मिलाने से इसकी विद्युत चालकता बढ़ जाती है।
- डोपिंग प्रकार:
- आन्तरिक अर्धचालक: इसमें डोपिंग नहीं की जाती है।
- बाह्य अर्धचालक: इसमें दो प्रकार की डोपिंग होती है:
- n-प्रकार अर्धचालक: इसमें पंचवें समूह के तत्व (जैसे फॉस्फोरस (P), आर्सेनिक (As)) जोड़े जाते हैं जिससे फ्री इलेक्ट्रॉन्स की संख्या बढ़ जाती है।
- p-प्रकार अर्धचालक: इसमें तृतीय समूह के तत्व (जैसे बोरॉन (B), गैलियम (Ga)) मिलाए जाते हैं जिससे होल्स की संख्या बढ़ जाती है।
- उपयोग:
- आन्तरिक अर्धचालक: इनका उपयोग सामान्यतः अध्ययन और नींव तैयार करने के लिए होता है।
- बाह्य अर्धचालक: ये विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स में उपयोग होते हैं, जैसे कि डायोड, ट्रांज़िस्टर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में।
संक्षेप में, आन्तरिक अर्धचालक शुद्ध रूप में होते हैं और इनका उपयोग सामान्य अध्ययन के लिए होता है, जबकि बाह्य अर्धचालक में अशुद्धियाँ मिलाकर उनकी विद्युत चालकता बढ़ाई जाती है और उनका उपयोग विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में होता है।
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